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जून, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

प्रेम मंदिर, वृंदावन

महाभारत

पाण्डव पाँच भाई थे जिनके नाम हैं - 1. युधिष्ठिर    2. भीम    3. अर्जुन 4. नकुल।      5. सहदेव ( इन पांचों के अलावा , महाबली कर्ण भी कुंती के ही पुत्र थे , परन्तु उनकी गिनती पांडवों में नहीं की जाती है ) यहाँ ध्यान रखें कि… पाण्डु के उपरोक्त पाँचों पुत्रों में से युधिष्ठिर, भीम और अर्जुन की माता कुन्ती थीं ……तथा , नकुल और सहदेव की माता माद्री थी । वहीँ …. धृतराष्ट्र और गांधारी के सौ पुत्र….. कौरव कहलाए जिनके नाम हैं - 1. दुर्योधन      2. दुःशासन   3. दुःसह 4. दुःशल        5. जलसंघ    6. सम 7. सह            8. विंद         9. अनुविंद 10. दुर्धर्ष       11. सुबाहु।   12. दुषप्रधर्षण 13. दुर्मर्षण।   14. दुर्मुख     15. दुष्कर्ण 16. विकर्ण     17. शल       18. सत्वान 19. सुलोचन   20. चित्र       21. उपचित्र 22. चित्राक...

नीलकंठेश्वर मंदिर, उदयपुर

🙏🌻🌹👉चौंक गए ना? ये तो हमारी सनातन कारीगरी का एक छोटा  रत्‍न है , पता नहीं कितने अनगिनत बहुमूल्‍य रत्‍न का नामो निशान मिटा दिया गया हमारे इतिहास से,🌻🌹 इसकी शानदार नक्कशियो को देखिए देखकर  🌍"अविश्वनीय" शब्द  के अलावा सायाद कोई शब्द निकले.....🌍👈 👉🌏लाला बलुआ पत्थर का प्रयोग केवल लालकिला बनाने में नहीं किया गया ना जाने कितने मन्दिर है जहां लाला बलुआ पत्थर का प्रयोग हुआ वो भी हजारों साल पहले, लेकिन अफसोस इस बात का है कि हम केवल लालकिले के बारे में ही जानते है😢🌏👈 😫😠🌷इसलिए हम  आपको वामपंथियों के इतिहास से जकड़ी हुई गुलामों की जंजीरों से बाहर लाने का प्रयत्न कर रहे है।।🌷😫😠😱 💥नीलकंठेश्वर_मंदिर ठीक लाल बलुआ पत्थर का निर्माण है, 10 वीं शताब्दी के परमार वास्तुकला का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।💥👌 🔥यहां आक्रमणकारियों द्वारा कई बार हमला किया गया  लेकिन इसकी भव्यता और सुंदरता को नष्ट करने में विफल रहे।🔥💥 👌🌹लेकिन यह मंदिर एक हजार साल बाद आज भी अपनी जगह पर सीना ताने सनातन से नफरत करने वालों को ललकार रहा है।🌹👌 🌲🎍🌹नीलकंठेश्वर मंदिर, उदयपुर 🌲...

कोदंदारमा देवस्थानम, आंध्रप्रदेश)

अंग्रेजों ने सच ही कहा है कि भारत सपेरों का देश है क्योकिं  हमने इतिहासकारों के रूप में ऐसे सांपो को पाला है जिन्होंने अपने वामपंथी विचारधारा के जहर से हमारे वास्तविक इतिहास की हत्या कर डाली ।              वैदिक वास्तुकला से निर्मित इस मंदिर को देखिए । इसे 16वीं शताब्दी में निर्मित किया गया था । यह शानदार मंदिर भगवान राम को समर्पित है । इतनी अद्भुत निर्माण की कहीं चर्चा ही नही ?? इस फोटो को पूरा देखने के लिए इस पर क्लिक करके देखिए (कोदंदारमा देवस्थानम, आंध्रप्रदेश)