📝📋➡️उड़िया लोक-कवि हलधर नाग के बारे में जब आप जानेंगे तो प्रेरणा से ओतप्रोत हो जायेंगे। हलधर एक गरीब दलित परिवार से आते हैं। 10 साल की आयु में मां बाप के देहांत के बाद उन्होंने तीसरी कक्षा में ही पढ़ाई छोड़ दी थी। अनाथ की जिंदगी जीते हुये ढाबा में जूठे बर्तन साफ कर कई साल गुजारे। बाद में एक स्कूल में रसोई की देखरेख का काम मिला। कुछ वर्षों बाद बैंक से 1000रु कर्ज लेकर पेन-पेंसिल आदि की छोटी सी दुकान उसी स्कूल के सामने खोल ली जिसमें वे छुट्टी के समय पार्टटाईम बैठ जाते थे। यह तो थी उनकी अर्थ व्यवस्था। अब आते हैं उनकी साहित्यिक विशेषता पर। हलधर ने 1995 के आसपास स्थानीय उडिया भाषा मे कुछ साहित्य लिखे भावनाओं से पूर्ण कवितायें लिख जबरन लोगों के बीच प्रस्तुत करते करते तो वो इतने लोकप्रिय हो गये कि राष्ट्रपति ने भी उन्हें साहित्य के लिये पद्मश्री प्रदान किया। पद्म पुरस्कार लेते वक्त हलधर नाग नंगे पैर थे । बहुत सम्भव है कि इस तस्वीर को देखकर आप का जी कुछ देर के लिए वर्तमान काल खण्ड से उचट जाये । फिर आपका खुद के जीवन से भी मन उचट जाए और तत्पश्चात आपका अहम् अपनी तुष्टि के लिए हलधर नाग...
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